राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जहां राष्ट्र भक्त स्वयंसेवकों का निर्माण करते हुए राष्ट्र को मानसिक और शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनाता है वहीं भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक विकास मे समाज की भागीदारी को को भी तय करता है। इसी प्रकार का निराश्रित बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास के लिए लोनी रोड गाजियाबाद मे गोपालधाम के रूप मे एक आश्रम स्थित है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सेवभारती का एक प्रकल्प है। गोपालधाम मे पूरे देश से आए हुए निराश्रित और अनाथ बच्चों का पालन पोषण, शिक्षा और पुनर्वास का अथक प्रयोजन किया जाता है।
गोपालधाम लोनी भोपुरा रोड पर लगभग 10,000 वर्ग फीट मे निर्मित है । यह भूमि वर्ष 1989 मे विष्णु जी प्रांत प्रचारक ने नागपाल भट्टे वालों से प्राप्त की थी, परन्तु गोपालधाम का औपचारिक रूप से प्रारम्भ वर्ष 2004 मे हुआ। प्रारम्भ मे यहाँ 22-23 बच्चे थे जिनमे लड़कियाँ और लड़के दोनों थे, जिनकी देख भाल के लिए महिला प्रशिक्षिकाएँ थीं, जिनमे से लकड़ियों को बाद मे गिन्नौर भेज दिया गया और लड़के यहीं रखे गए। 2006 मे जम्मू काश्मीर से सेना ने संपर्क किया और सेवा भारती के माध्यम से कुछ निराश्रित बच्चे यहाँ और भेजे गए, धीरे धीरे सेवभारती और अन्य स्वयंसेवी संस्थानों के माध्यम से अन्य राज्यों से भी निराश्रित बच्चे आए। वर्तमान मे 15 राज्यों के बच्चे यहाँ पोषित हो कर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
पूरे देश से निराश्रित बच्चों के आने के कारण उनके बीच भाषाई और बौद्धिक स्तर जैसी अनेक समस्याएँ होती हैं जिन्हें दूर करने के लिए प्रवेशिका से लेकर चौथी कक्षा तक बच्चे गोपालधाम मे ही पढ़ते हैं, जिनके लिए तीन शिक्षिकाएँ हैं। चौथी कक्षा के बाद बच्चे इस प्रकार तैयार हो जाते हैं कि उन्हें गोपालधाम से बाहर स्कूलों मे शिक्षा के लिए भेजा जाता है जिसमे मंडोला और राजेन्द्रनगर गाजियाबाद का विवेकानन्द विद्यामन्दिर प्रमुख विद्यालय हैं। विद्यालयों मे शिक्षा प्राप्थ करने के लिए भेजने हेतु गोपालधाम का अपना स्कूल वाहन भी है। गोपाल धाम मे कंप्यूटर और संगीत जैसी शिक्षा नियमित रूप से दी जाती है। यहाँ सुगम और क्लासिकल दोनों तरह के संगीत सिखाये जाते हैं।
यह अपनी तरह का पहला प्रकल्प है जो अपने पैरों पर खड़ा है। यह सरकार से किसी भी तरह का अनुदान नहीं लेता है। इसके पीछे यह विचार है कि सरकार द्वारा अनुदान लिए जाने से संसाधनों मे अनियमितता का होना संभाव्य है जबकि एक सामाजिक हित के कार्य मे समाज की भागीदारी ही महत्वपूर्ण है, छोटे छोटे कई लेकिन नियमित दानदाताओं के सहयोग से ही यह प्रकल्प चलता है। 15 संगठन हैं जो मुख्य रूप से तरह तरह से अपनी भागीदारी देते हैं। जिनमे भारत विकास परिषद राजेंद्र नगर से कुलभूषण जी बागवानी देखते हैं, इसके अतिरिक्त सुंदर कांड प्रेमी मण्डल, रामायण मण्डल, बालाजी मंदिर, अमृतवाणी आनंद विहार, आदि मिला कर इस तरह के 15 संगठन हैं जो सक्रिय योगदान करते हैं। हर चीज़ दानदाताओं के सहयोग से ही होती हैं। कुल मिला कर 135 दानदाता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। प्रयास रहता है कि बाज़ार से कुछ भी न लिया जाय, हर चीज़ किसी न किसी के माध्यम से नियमित रूप से आती है। बड़े दानदाताओं की अपेक्षा छोटे छोटे अनेक दानदाताओं के सहयोग से इसकी निरंतरता बनी रहती है और सामाजिक सहभागिता भी सुनिश्चित होती है।
गोपालधाम मे रहने वाले छात्रों के लिए जाड़े मे ट्रैक सूट और नीली शर्ट और गर्मी मे खाकी नेकर और हरी शर्ट दी जाती है। छात्रों के लिए भोजन आदि के प्रबंध के लिए दो कर्मचारी मानदेय पर हैं जो नियमित रूप से भोजन व्यवस्था देखते हैं। प्रत्येक सोमवार से बालाजी मंदिर विवेक विहार से पूड़ी और हलवा का प्रसाद आता है तथा प्रत्येक मंगल वार को दाल और चावल आता है। बुधवार को खीर,सब्जी,रोटी और चावल बनता है बृहस्पतिवार को कढ़ी पकौड़ी वाली, शुक्रवार को दाल चावल रोटी सब्जी, शनिवार को पुनः कढ़ी बनती है। रविवार को भी दाल चावल रोटी सब्जी बनती है। गोपालधाम मे सुबह नाश्ते मे रविवार को मटर के छोले, सोमवार को दलिया, मंगल को रोटी, बुद्धवार को नमकीन दलिया, बृहस्पति को चूड़ा, शुक्रवार को भी कुछ न कुछ और शनिवार को काले चने दिये जाते हैं।
यहाँ सभी बच्चे किसी न किसी संस्था द्वारा ही भेजे हुए होते हैं और वास्तव मे निराश्रित होते हैं। उदाहरण के रूप मे दो बच्चे बच्चे लोनी से हैं –बाप माँ नशा करते थे, दादी ने पालन पोषण किया था। एक बच्चा उड़ीसा से बच्चा आया है जिसकी माँ मानसिक रूप से पीड़ित है, पिता की मृत्यु हो चुकी है। खोड़ा से एक बच्चा है जिसकी माँ मानसिक रूप से पीड़ित है। दो बच्चे झंडापुर से हैं जिनके माँ बाप नहीं है, दो बच्चे दुहाई से हैं जिनके माँ बाप नहीं हैं, साधना फाउंडेशन द्वारा दो बच्चे आए हैं जिनके माँ बाप का पता नहीं है।
गोपालधाम निराश्रित बच्चों को शिक्षित कर अपने पैरों पर खड़ा होने लायक बनाने का कार्य कर रहा है। जब बच्चे पढ़ लिख कर बड़े हो जाते हैं और बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर लेते हैं तो उन्हें उन्हीं संस्थाओं को वापस दे देते हैं जहाँ से वो आए थे। आगे वो संस्थाएं ही निर्णय करती हैं कि उन बच्चों का क्या करना है। वे बच्चे जिनके माता पिता नहीं हैं उन्हें कहीं न कहीं नौकरी मे दिलवाने का प्रयास गोपालधाम के माध्यम से ही किया जाता है, इसके लिए गोपालधाम मे कंप्यूटर की लैब है जहां हम इन्हें कंप्यूटर की शिक्षा भी दी जाती है। गोपाल धाम मे बच्चों के खेलने के लिए पार्क और क्रीडा स्थल का भी निर्माण किया गया है।
गोपालधाम के परिसर मे ही एक सुंदर सुव्यवस्थित और विशाल गोशाला है जिसमे दो व्यक्ति नियमित रूप से गौ सेवा के लिए रहते हैं और गौ-परिवार की देख-रेख करते हैं। वर्तमान मे यहाँ 23 गौ-परिवार हैं। यहाँ का दूध गोपालधाम मे ही उपयोग किया जाता है।
गोपालधाम को पूरी तरह से संयोजित करने का कार्य ज्ञान प्रकाश जी करते हैं, जिनकी देख रेख मे गोपाल धाम निरन्तर विकसित हो रहा है। सीधी सरल परन्तु दृढ़ और स्पष्ट भाषा मे बात करने वाले ज्ञान प्रकाश जी बताते हैं कि मनुष्य की आकांक्षाएँ असीम हैं इस लिए अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं के साथ रहना ही श्रेष्ठ विकल्प है। गोपालधाम का लेखा- संबंधी कार्यों को विवेक जी देखते हैं। गोपालधाम के छात्रावास के वार्डन विकास चकमा जी हैं। विवेक जी अवैतनिक हैं और गोपालधाम मे रहने वाले छात्रों का पूरा ध्यान रखते हैं। इसके अतिरिक्त दो व्यक्ति गोशाला के लिए, दो व्यक्ति भोजन व्यवस्था के लिए, दो ड्राइवर, एक सिक्योरिटी भी हैं जो मानदेय पर कार्य करते हैं। मदनमोहन जी भोजनालय और अविनाश जी अन्य व्यवस्था संबंधी कार्य देखते हैं।
गोपालधाम विशेष रूप से इस लिए भी प्रभावित करता है कि यहाँ जाति, धर्म और क्षेत्रवाद से ऊपर उठ कर निराश्रित बच्चों को आश्रय और शिक्षा प्रदान की जाती है। यहाँ जम्मू काश्मीर से बेघर हुए मुस्लिम बच्चे भी बिना किसी भेदभाव के पोषित और शिक्षित हो रहे हैं। यह समाज की सहभागिता से पोषित निराश्रित बच्चों के हितार्थ अपने आप मे अनुपम सेवा प्रकल्प है।
गोपालधाम मे शनिवार का समय बाहर से आने वाले अतिथियों के लिए खुला होता है।
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