अब जाग उठो अब कमर कसो आहुति की राह बुलाती है
ललकार रही दुनिया हमको भेरी आवाज़ लगाती है
भारत माता के वीर सपूतो धारा की पहचान करो
नावों के बंधन को खोलो पतवार उठा प्रस्थान करो
फिर नए लक्ष्य की चाह विजय की राह तुम्हें दिखलाती है
ललकार रही दुनिया हमको भेरी आवाज़ लगाती है
तंद्रा छोड़ो आँखें खोलो अब नए लक्ष्य संधान करो
तम की कारा को तोड़ फोड़ जगती का नव उत्थान करो
जब अपनी बाहों मे बल हो तो दुनिया पलक बिछाती है
ललकार रही दुनिया हमको भेरी आवाज़ लगाती है
अब प्रण की बारी आई है अब रण की बारी आई है
तन मन को जो दूषित कर दे वो रात दुधारी आई है
भारत माँ अपने बेटों को सत्पथ की राह बुलाती है
ललकार रही दुनिया हमको भेरी आवाज़ लगाती है
प्रस्तुति... पद्म सिंह

भारत माता के वीर सपूतो धारा की पहचान करो
जवाब देंहटाएंनावों के बंधन को खोलो पतवार उठा प्रस्थान करो
फिर नए लक्ष्य की चाह विजय की राह तुम्हें दिखलाती है
ललकार रही दुनिया हमको भेरी आवाज़ लगाती है
बेहतरीन रचना.....