ईसाई नवबर्ष मनाने का कोई औचित्य नही।

क्रिसमस को अगर ईसा के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता हैं तो फिर क्रिसमस में तो जन्मदिन जैसा कोई अर्थ नहीं है और उनके जन्म को लेकर ईसाई विद्वानों में ही मतभेद हैं....और उनके जन्म को 4 ईसा पूर्व बताते हैं तो कोई कुछ और ठीक हैं अगर मान लीजिये कि 25 दिसंबर को ही ईसा का जन्म हुआ था तो अपना नया साल एक सप्ताह बाद क्यों ?

आपको तो नया साल का शुरुआत उसी दिन से करना चाहिए था! कोई जवाब नहीं हैं उनके पास लेकिन हमारे पास हैं और जिन शब्दों का अर्थ उन्हें नहीं मालुम वो हमें हैं वो इसलिए कि लहरेंनदी के जितना विशाल नहीं हो सकती एक और प्रशन कि वो लोग अपना अगलादिन और तिथि रात के 12 बजे उठकर क्यों बदलते हैं जबकि दिन तो सूर्योदय के बाद होता हैं।

तनिक विचार कीजिये कि अंग्रेजी में सेप्ट (Sept) 7 के लिए प्रयुक्त होता हैं Oct आठ के लिए Deci दस के लिए तो फिर September, October, November &December क्रमश: नौवा, दसवां, ग्यारहवा और बारहवां महिना कैसे हो गया?? सितम्बर को तो सातवाँ महिना होना चाहिए फिर वो नॉवा महीना इसका कारण ये हैं कि 1752 ई0 तक इंग्लैण्ड में मार्च ही पहला महीना हुआ करता था और उसी गणित से 7वां महीना सितम्बर और दसवां महीना दिसंबर था लेकिन १७५२ के बाद जब शुरूआती महीना जनवरी को बनाया गया तब से साड़ी व्यवस्थाये बिगड़ी तो अब समझे कि क्रिसमस को (X-mas) क्यों कहते हैं! "x" जो रोमन लिपि में दस का संकेत हैं और "mas" यानी मॉस, यानी दसवां महीना उस समय दिसंबर दसवां महीना था जिस कारण इसका X-mas नाम पड़ा और मार्च पहला महीना इस लिए होता था क्योंकि भारतीय लोग इसी महीने में अपना नववर्ष मानते थे और अभी भी मानते हैं तो सोचिये कि हम लोग बसंत जैसे खुशालसमय जिसमे पैड-पौधे, फुल पत्ते साड़ीप्रकृति एक नए रंग में रंग जाती हैं और अपना नववर्ष मानती हैं उसे छोड़कर जनवरी जैसे ठन्डे, दुखदायी और पतझड़ के मौसम में अपना नयासाल मानकर हम लोग कितने बेवकूफ बनते हैं।

सितम्बर यानी सप्त अम्बर यानी आकश का सातवां भाग...... हिन्दुओ ने आकाश को बारह भागों में बाँट रखा था जिसका सातवा, आठवां, नौवां और दसवां भाग के आधार पर ये चरों नाम हैं। तो अब समझे कि इन चार महीनो का नाम सेप्टेम्बर, अक्तूबर, नवम्बर और दिसंबर क्यों हैं l संस्कृत में ७ को सप्त कहा जाता हैं तो अंग्रेजी में सेप्ट, अष्ट को ओक्ट, दस को डेसी अंग्रेज लोग "त" का उच्चारण "ट" और "द" का "ड" करते हैं इसलिए सप्त सेप्ट और दस डेश बन गया तो इतनी समानता क्यों?? आप समझ चुके होंगे कि मैं किस और इशारा कर रहा हूँ! अगर अभी भी अस्पष्ट हैं तो चिंता कि बात नहीं आगे स्पष्टहो जाएगा .........

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी जानकारी है। भारतीय संस्कृति को चोरी कर के लोग धन्नासेठ बन गए और आज भारत उनकी जूठन ताकने को मजबूर है। अपना गौरव भूल जाने वाली नस्लों का यही होता है।

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  2. बहुत अच्छी जानकारी है । Moderator को धन्यवाद ..

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