स्वामी
विवेकानंद की 150 वीं जयन्ती वर्ष को ‘भारत
जागो विश्व जगाओ’ अभियान के रूप मे मनाया जाएगा। इसी परिप्रेक्ष्य
मे स्वामी विवेकानन्द सार्धशती समारोह समिति नोएडा महानगर के तत्वाधान मे नोएडा
महानगर के विभिन्न स्थानों से शोभा यात्राएँ निकाली गईं। शोभा यात्राओं मे लगभग 8 स्थानों से कार और दुपहिया वाहनों पर पताकाएँ और
स्वामी विवेकानन्द के चित्रों तथा उनके घोषवाक्यों की तख्तियों सहित हजारों की
संख्या मे लोगों ने भाग लिया। स्वामी विवेकानन्द सार्धशती समारोह समिति नोएडा
महानगर के संयोजक राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि देश का युवा आज पाश्चात्य संस्कृति
के प्रभाव से जहाँ अपने मौलिक आदर्शों से विरत हो रहा है वहीं आधुनिकता की आंधी
दौड़ मे दिग्भ्रमित भी है। साथ ही समाज भ्रूण हत्या, नशा,
एवं बलात्कार जैसी आम हो चुकी घटनाओं से आहत भी है। भारत के गौरवमयी आदर्शों के
प्रणेता स्वामी विवेकानन्द के विचारों को देश के कोने कोने तक पहुंचाने और युवाओं
को जगाने हेतु स्वामी जी की 150 वीं जयंती वर्ष मे पूरे वर्ष भाँति भाँति के
कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसी क्रम मे दिनांक 18 फरवरी को देश भर मे सामूहिक
सूर्यनमस्कार महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। शोभा यात्राओं मे खोड़ा नगर क्षेत्र से लगभग
90 वाहन, सेक्टर 62 क्षेत्र से लगभग 75 वाहन,
सेक्टर 55 नोएडा से 60 वाहन, सेक्टर 12 से लगभग 80 वाहन,
सेक्टर 19 नोएडा से 50 वाहन, सेक्टर 44 से 40 वाहन,
भंगेल नोएडा से 60, भंगेल से 98 वाहन तथा ॐ नगर से 30 वाहनों के साथ
पूरे महानगर मे आठ स्थानों से लगभग 583 वाहनों के साथ शोभायात्राएँ निकाली गईं।
शोभायात्राओं मे हजारों की संख्या मे लोगों की उपस्थिति रही। भव्य यात्राएं निकाली
गईं।
जवाब देंहटाएंAnil Singh
12 minutes ago
स्वामी विवेकानंद जी के १५० वीं जयंती पर सभी को शुभकामनायें
स्वामी विवेकानन्द जी का जन्म: १२ जनवरी,१८६३ तथा मृत्यु: ४ जुलाई,१९०२ को हुई थी। आप वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। आपका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। आपने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का वेदान्त अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। आपने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। आपको प्रमुख रूप से आपके भाषण की शुरुआत " मेरे अमेरिकी भाइयों एवं बहनों " के साथ करने के लिए जाना जाता है ।
उन्तालीस वर्ष के संक्षिप्त जीवनकाल में स्वामी विवेकानंद जो काम कर गए, वे आनेवाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
तीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो, अमेरिका में विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और उसे सार्वभौमिक पहचान दिलवाई। गुरुदेव रवींन्द्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था, ‘‘यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानंद को पढ़िए। उनमें आप सब कुछ सकारात्मक ही पाएँगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं।’’
वे केवल संत ही नहीं थे, एक महान् देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव-प्रेमी भी थे। अमेरिका से लौटकर उन्होंने देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा था, ‘‘नया भारत निकल पड़े मोदी की दुकान से, भड़भूंजे के भाड़ से, कारखाने से, हाट से, बाजार से; निकल पडे झाड़ियों, जंगलों, पहाड़ों, पर्वतों से।’’ और जनता ने स्वामीजी की पुकार का उत्तर दिया। वह गर्व के साथ निकल पड़ी। गांधीजी को आजादी की लड़ाई में जो जन-समर्थन मिला, वह विवेकानंद के आह्वान का ही फल था।
स्वामी जी के जीवन की कुछ महत्वपूर्ण तिथियाँ
12 जनवरी, 1863 -- कलकत्ता में जन्म
1879 -- प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश
1880 -- जनरल असेंबली इंस्टीट्यूशन में प्रवेश
नवंबर 1881 -- श्रीरामकृष्ण से प्रथम भेंट
1882-86 -- श्रीरामकृष्ण से संबद्ध
1884 -- स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण; पिता का स्वर्गवास
1885 -- श्रीरामकृष्ण की अंतिम बीमारी
16 अगस्त, 1886 -- श्रीरामकृष्ण का निधन
1886 -- वराह नगर मठ की स्थापना
जनवरी 1887 -- वराह नगर मठ में संन्यास की औपचारिक प्रतिज्ञा
1890-93 -- परिव्राजक के रूप में भारत-भ्रमण
25 दिसंबर, 1892 -- कन्याकुमारी में
13 फरवरी, 1893 -- प्रथम सार्वजनिक व्याख्यान सिकंदराबाद में
31 मई, 1893 -- बंबई से अमेरिका रवाना
25 जुलाई, 1893 -- वैंकूवर, कनाडा पहुँचे
30 जुलाई, 1893 -- शिकागो आगमन
अगस्त 1893 -- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. जॉन राइट से भेंट
11 सितंबर, 1893 -- विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में प्रथम व्याख्यान
27 सितंबर, 1893 -- विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में अंतिम व्याख्यान
16 मई, 1894 -- हार्वर्ड विश्वविद्यालय में संभाषण
नवंबर 1894 -- न्यूयॉर्क में वेदांत समिति की स्थापना
जनवरी 1895 -- न्यूयॉर्क में धार्मिक कक्षाओं का संचालन आरंभ
अगस्त 1895 -- पेरिस में
अक्तूबर 1895 -- लंदन में व्याख्यान
6 दिसंबर, 1895 -- वापस न्यूयॉर्क
22-25 मार्च, 1896 -- वापस लंदन
मई-जुलाई 1896 -- हार्वर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्यान
15 अप्रैल, 1896 -- वापस लंदन
मई-जुलाई 1896 -- लंदन में धार्मिक कक्षाएँ
28 मई, 1896 -- ऑक्सफोर्ड में मैक्समूलर से भेंट
30 दिसंबर, 1896 -- नेपल्स से भारत की ओर रवाना
15 जनवरी, 1897 -- कोलंबो, श्रीलंका आगमन
6-15 फरवरी, 1897 -- मद्रास में
19 फरवरी, 1897 -- कलकत्ता आगमन
1 मई, 1897 -- रामकृष्ण मिशन की स्थापना
मई-दिसंबर 1897 -- उत्तर भारत की यात्रा
जनवरी 1898 -- कलकत्ता वापसी
19 मार्च, 1899 -- मायावती में अद्वैत आश्रम की स्थापना
20 जून, 1899 -- पश्चिमी देशों की दूसरी यात्रा
31 जुलाई, 1899 -- न्यूयॉर्क आगमन
22 फरवरी, 1900 -- सैन फ्रांसिस्को में वेदांत समिति की स्थापना
जून 1900 -- न्यूयॉर्क में अंतिम कक्षा
26 जुलाई, 1900 -- यूरोप रवाना
24 अक्तूबर, 1900 -- विएना, हंगरी, कुस्तुनतुनिया, ग्रीस, मिस्र आदि देशों की यात्रा
26 नवंबर, 1900 -- भारत रवाना
9 दिसंबर, 1900 -- बेलूर मठ आगमन
जनवरी 1901 -- मायावती की यात्रा
मार्च-मई 1901 -- पूर्वी बंगाल और असम की तीर्थयात्रा
जनवरी-फरवरी 1902 -- बोधगया और वारणसी की यात्रा
मार्च 1902 -- बेलूर मठ में वापसी
4 जुलाई, 1902 -- महासमाधि
जय महाकाल
बहुत सुंदर देशदीपक जी ... अच्छी जानकारी दी है आपने
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