आतंकवाद का भी धर्म होता है क्या ? ...

                     राहुल गाँधी की ताजपोशी के अवसर पर भारत के गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे का आपत्तिजनक बयान आया है की भाजपा और आरएसएस के कैंपों मे हिन्दू आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। भगवा को आतंक से जोड़ कर कहीं न कहीं कांग्रेस की नियति मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण का प्रयास स्पष्ट दिखाई देता है। भगवा जो हमारी प्राचीन सनातन परम्परा मे ओज और त्याग का प्रतीक रहा है, भगवा जो बलिदान और समर्पण का चिन्ह रहा है, भगवा जो भारत के तिरंगे मे सबसे ऊपर शोभायमान है उसे आतंकवाद से जोड़ कर कांग्रेसी मंत्री ने अपनी संकीर्ण सोच का परिचय दिया है। आतंक अगर हिन्दू हो सकता है तो आतंक मुस्लिम या क्रिश्चियन भी हो सकता है। शिंदे ने आतंकवाद को किसी धर्म विशेष से जोड़ कर नई बहस को जन्म दिया है कि क्या आतंकवाद का धर्म भी होता है ? ऐसी ओछी और क्षुद्र टिप्पणी से जहां भारत का राष्ट्रप्रेमी हिन्दू मन आहत है वहीं चहुंओर इस बयान की कड़ी निंदा हो रही है । 

                        हम सब जानते है कि आतंकवाद का कोई धर्म नही होता,उसकी कोई जात नही होती और ना ही उसका कोई रंग होता है.आतंकवाद आतंकवाद है,अपराध है और कुल मिलाकर देशद्रोह है.पर अपने देश में पता नही क्यों इसे एक रंगवाद में बदला जा रहा है.भगवा आतंकवाद या हिंदू आतंकवाद के नाम पर राजनितिक रोटियां सेंक रहे नेता जाने अंजाने हरे आतंकवाद या मुस्लिम आतंकवाद की परिभाषा तय कर रहे है.आरएसएस को बापू की हत्या से जोडकर राजनिती से अछूत बनाये रखने में सफल रहे कांग्रेस को अब उसे आतंकवाद से जोडकर अलग थलग रखना हो सकता है राजनितीक मजबूरी हो पर ये देश की एकता और अखण्डता के लिये बिल्कुल भी अच्छा नही है.हिंदू आतंकवाद कह कह कर हिंदू को अपने ही देश में अपमानित करने का कुचक्र हो सकता है कि उनके किसी खास वोट बैंक को मज़बूत कर दे,मगर ये दांव अगर हिंदूओं मे नफरत और अलगाव के बीज़ बो गया तो खतरनाक हो जायेगा.कांग्रेस के शीर्ष नेतृ्त्व को चाहिये अपने बडबोले और अतिविद्वान नेताओ को इस तरह आतंकवाद को धर्म,जात और रंग के आधार पर ना बांटे. 

1962 के युद्ध में जब भारत के वीर जवान  नेहरु की वजह से बुरी तरह से मारे जा रहे थे तब आर एस एस के ही स्वयंसेवकों ने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई में शामिल जवानो की मदद की थी, घायल सैनिकों को अस्पताल पहुँचाया था , उन्हें रसद उपलब्ध करवाया था , खाना और पानी की व्यवस्था की थी , और यहाँ तक की इसी कार्य में अपने 100 स्वयंसेवक भी दुश्मन के हमले में खो दिए थे ...............
आर एस एस के स्वयंसेवकों के इसी पराक्रम से प्रसन्न होकर भारत सरकार ने उन्हें गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया 

आज ज़रूरत है इस तरह के बरगलाने वाले बयानों से सावधान रहने की... 

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